.. जबलपुर महापौर के लिए पूर्व निगम आयुक्त Ved Prakash को बना सकती है उम्मीदवार !

महापौर के लिए पूर्व निगम आयुक्त वेदप्रकाश को भी बनाया जा सकता है उम्मीदवार ।

5 साल कमिश्नर रहते शहर विकास में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका, सेवानिवृत्ति के बाद जबलपुर को बनाया अपना घर ।

नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही महापौर पद के लिए प्रत्याशियों के चयन पर भी चर्चा शुरू हो गई है, ऐसे में योग्य प्रत्याशी की बात करें तो पूर्व नगर निगम आयुक्त वेदप्रकाश का चेहरा सामने आता है। मई 2013 से मई 2018 तक जबलपुर के निगमायुक्त रहने वाले वेदप्रकाश का यहाँ से ऐसा लगाव हुआ कि वो सेवानिवृत्ति के बाद यहीं के हो गए।

स्मार्ट सिटी की अवधारणा जब आई तो वेदप्रकाश ही निगमायुक्त थे और उनके शहर विकास के अभियान को एक तरह से पंख लग गए। चौराहों और सड़कों का चौड़ीकरण या अतिक्रमण हटाने की मुहिम हो अथवा लेफ्ट टर्न विकसित करने के प्रयास, ऐसे बहुत से काम उनके कार्यकाल में हुए, जिनसे जबलपुर को सहज-सुगम शहर बनाने में मदद मिली। इसके अलावा सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल गतिविधियों में उनकी रुचि ने भी जबलपुर को बीते स्वर्णिम काल की याद दिलाई।

प्रदेश के बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर को यदि विकास की दृष्टि से आँका जाए तो जनसंख्या में तीसरे नम्बर पर होने के बावजूद विकास में जबलपुर सबसे पिछड़ा हुआ है।

ऐसे में पूर्व निगमायुक्त वेदप्रकाश यदि महापौर पद तक पहुँचते हैं तो निःसंदेह उनके 5 साल के यहाँ कामकाज के अनुभव का लाभ तो मिलेगा ही, साथ ही आईएएस होने की वजह से प्रशासनिक पकड़ का भी फ़ायदा मिलेगा। अभी तक जो भी अफ़सर यहाँ निगमायुक्त बनकर आते हैं, आमतौर पर उनका कार्यकाल 2-3 वर्षों का होता है और इस अवधि में भी उन पर तबादले की तलवार लटकी रहती है, जिससे विकास की रफ्तार प्रभावित होती है।

5 साल निगमायुक्त रहने के कारण वेदप्रकाश को यहाँ के राजनीतिज्ञों के साथ कामकाज और समन्वय का भी खासा अनुभव है, जो यहाँ चल रहे फ़्लाईओवर के निर्माण के अलावा प्रस्तावित रिंग रोड, क्रिकेट स्टेडियम, नर्मदा रिवर फ्रंट, स्मार्ट रोड्स सहित स्मार्ट सिटी के बड़े प्रोजेक्ट्स में काम आएगा।

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