भाजपा ने 20 हजार से ज्यादा चंदा देने वालों की सूची मांगी, जिलों में मचा हड़कंप

भोपाल | Political News Update

मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए सभी जिलों से उन लोगों की विस्तृत जानकारी मांगी है, जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20 हजार रुपये से अधिक का चंदा दिया है। इस निर्देश के बाद प्रदेश के कई जिलों में हलचल तेज हो गई है।


📊 क्या मांगी गई जानकारी?

भाजपा प्रदेश संगठन ने जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे सभी दानदाताओं की पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं, जिसमें शामिल हैं:

  • दानदाता का नाम और पता
  • बैंक का नाम
  • दान की राशि
  • चेक नंबर और तारीख
  • ₹20,000 से अधिक देने वालों का PAN नंबर

👉 इसके साथ ही ऑडिट रिपोर्ट और बैंक स्टेटमेंट भी 15 मई तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।


⚠️ क्यों लिया गया यह फैसला?

सूत्रों के अनुसार, कई जिलों ने “आजीवन सहयोग निधि” का पूरा हिसाब अब तक प्रदेश इकाई को नहीं दिया है। अब पार्टी ने साफ कर दिया है कि:

  • जो जिले समय पर हिसाब नहीं देंगे
  • ➡️ उन्हें उनके हिस्से की 25% राशि रोकी जा सकती है

👉 इससे संगठन में पारदर्शिता और फंड मैनेजमेंट को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है।


🏢 किराये के भवनों पर भी सख्ती

इस आदेश के तहत सिर्फ फंड ही नहीं, बल्कि संपत्तियों की जानकारी भी मांगी गई है:

  • जिन जिलों में पार्टी कार्यालय किराये पर हैं
  • ➡️ वहां से किरायेदारों को हटाने की तैयारी
  • अगले 2 महीनों में दुकानों/भवनों को खाली कराया जाएगा

🏦 बैंक खातों और संपत्ति की जांच

  • सभी बैंक खातों का पूरा स्टेटमेंट देना होगा
  • कोई भी “अप्रयुक्त/बचत खाता” न रखा जाए
  • 2025-26 में खरीदी गई संपत्ति की पूरी जानकारी देनी होगी

👉 जहां पार्टी की खुद की संपत्ति है, वहां रजिस्ट्री दस्तावेज भी जमा करने होंगे


🧾 खर्च का पूरा हिसाब देना होगा

जिलों से यह भी पूछा गया है कि:

  • पैसा कहां खर्च हुआ?
  • वेतन, बिजली बिल और अन्य खर्च का विवरण

👉 मतलब अब हर खर्च की डिटेल रिपोर्टिंग जरूरी होगी


🧠 क्या है इसका बड़ा मतलब?

  • फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना
  • संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना
  • हर जिले की वित्तीय स्थिति पर कड़ी निगरानी

🎯 निष्कर्ष

भाजपा का यह निर्णय प्रदेश स्तर पर फंड मैनेजमेंट और पारदर्शिता को लेकर बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कितने जिले समय पर रिपोर्ट देते हैं और किन पर कार्रवाई होती है।

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