क्या बॉलीवु़ड की चमक से दूर एक आम जिंदगी में खो जाना ही जायरा वसीम का सच है ?

सोशल मीडिया ना केवल सेलेब्स और लोगों के बीच शेयरिंग का एक जरिया बना है बल्कि कई दिलचस्प मीम कल्चर भी ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिलते हैं. ऐसे ही एक मीम कल्चर पर कई लोगों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती है. इस कल्चर का एक कैरेक्टर है डूमर.

डूमर यानि अपनी लाइफ के दूसरे दशक में मौजूद वो लोग, जो दुनिया को लेकर एक नकारात्मक विचार रखते हैं और मौजूदा हालातों के चलते भविष्य और वर्तमान को लेकर खास सकारात्मक नहीं है. डिप्रेसिंग म्यूजिक सुनते हैं. ग्लोबल वार्मिंग, सोशल मीडिया पर दुनिया भर के गृहयुद्धों से फैली तस्वीरें, भ्रष्ट सरकारें और मनुष्य की घटती चेतनाओं के चलते ये लोग अपनी जिंदगी केवल जिए जा रहे हैं. हालांकि बूमर नाम का एक दूसरा समुदाय ऐसा भी है जो अपने क्लास के चलते प्रीविलेज्ड है और चीज़ों के प्रति इग्नोर होते हुए अपनी लाइफ को मस्ती में काट रहे हैं.

जायरा वसीम बॉलीवुड से रिटायर हो चुकी हैं. उनका ये फैसला कई लोगों के लिए अप्रत्याशित साबित हुआ है, लेकिन अगर उनके सोशल प्रोफाइल पर नजर डाली जाए तो एक पल को एहसास होगा कि वे भी कहीं ना कहीं ‘डूमर’ की श्रेणी में आती हैं.

वे सूडान में सेना द्वारा आंदोलन कर रहे लोगों की मारपीट को शेयर करती हैं तो यमन में खतरनाक भुखमरी पर भी ट्वीट करती हैं. आसिफा की त्रासदी को शेयर करती हैं और कश्मीर में तनाव को लेकर भी संवेदनशील है. वे मानती हैं कि सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाने के साथ ही सरकारों को कदम उठाने के लिए मजबूर किया जा सकता है. इंस्टाग्राम पर अपने आपको भयावह स्तर पर प्रमोट करते सितारों के बीच जायरा वसीम की इंस्टाग्राम पर एक भी सेल्फी नहीं है. अपनी ट्रिप्स की तस्वीरों को जायरा भले शेयर करती हों, लेकिन उनके पोस्ट्स किसी एक्टर की तरह कम बल्कि मानवाधिकार समर्थक एक्टिविस्ट जैसे ज्यादा लगते हैं, जिसका एस्थेटिक सेंस कूल है.

उनके ट्विटर पोस्ट्स से साफ है कि कि जायरा मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील हैं और पर्यावरण के खतरों को लेकर भी लोगों को आगाह करती हैं. जाहिर है, उनके मन में भविष्य को लेकर बहुत पॉजिटिव इमेज नहीं ही होगी. ऐसे में वे बॉलीवुड को भी एक करियर मात्र से ज्यादा ट्रीट नहीं करती होंगी. जहां मायानगरी की अंधी दुनिया में लोग खूब महत्वाकांक्षी होकर नेचर से अपने आपको अलग कर रहे हैं, वहीं जायरा का बॉलीवुड से अलगाव अपनी जड़ों की तरफ वापस जाने का रास्ता हो सकता है.

जायरा ने अपने लेटर में ये भी लिखा कि उन्हें यूथ के लिए रोल मॉडल के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाने लगा. लेकिन वे अपनी लाइफ में ऐसा कुछ नहीं करना चाहती थीं. ये भी जरूरी नहीं कि कोई करियर अगर लोगों को शोहरत और दौलत के रास्ते पर ले जाता हो, वो रास्ता ठीक ही हो. ऐसे में जायरा का फैसला एक करियर स्विच भी हो सकता है. क्योंकि कई लोगों की तरह शायद जायरा भी पब्लिक लाइफ के साथ सहज नहीं हैं.

हालांकि मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ घर-परिवारों में बचपन से ही धर्म को लेकर एक ऐसी धारणा बना दी जाती है जो बच्चों के अवचेतन मन में घर कर जाती है जिसके चलते जिंदगी भर वे अपने हर कदम को धर्म के चश्मे से देखती हैं. कई इंसानों के लिए यूं भी धर्म और आस्था उम्मीद का दूसरा नाम होता है, ऐसे में जायरा का फैसला या तो इसी धर्म में अंधे हो जाने का नतीजा हो सकता है या वे वाकई एक गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक माइंडसेट रखती हैं.  

 छल-कपट के दौर में सच बोलना ही एक क्रांतिकारी काम है.

जायरा ने अपनी बॉलीवुड रिटायरमेंट से पहले जॉर्ज ओरवेल का ये क्वोट शेयर किया है.

शायद इस ट्वीट में ही उनकी सच्चाई है. शायद जायरा दौलत, शोहरत, तड़क भड़क की जिंदगी से दूर एक आम जिंदगी में ही रम जाना चाहती हैं. शायद सोशल मीडिया के सनसनीखेज दौर में कोई उनकी सच्चाई जानना ही नहीं चाहता है.

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