तीसरी आने के बाद झारखंड भाजपा की दूसरी सूची की खोजी जा रही है : सरयू रॉय समर्थको की बेचैनी बढ़ी

तीसरी आने के बाद झारखंड भाजपा की दूसरी सूची की खोजी जा रही है : सरयू रॉय समर्थको की बेचैनी बढ़ी

“सरयू रॉय समर्थको का इंतजार”

आज झारखंड भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट भी जारी कर दी। साथ ही इस तीसरी लिस्ट के आने से मुख्यमंत्री रघुवर दास की मुखर आलोचना करने वाले भाजपा के ही दिग्गज नेता और वर्तमान सरकार में मंत्री रहे सरयू रॉय के समर्थकों में बेचैनी अच्छी खासी बढ़ चुकी है। सरयू रॉय के समर्थकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि रघुवर दास के कद को सरयू ही चुनौती दे सकते हैं ऐसी परिस्थितियों में उन्हें पीछे ढ़केलने का कड़ा प्रयास चल रहा है। देश कांग्रेस हो या भाजपा यह दोनों ही प्रमुख पार्टियां हमेशा से ही अंदरूनी गुटबाजियों से कभी बच नही पाई हैं। झारखंड भाजपा में अब तक कुल 81 उम्मीदवारों में से आज 15 उम्मीदवारों के नाम घोषित हुए जबकि 10 नवम्बर को पहली सूची में 52 लोगों के नामों की घोषणा की गई थी। इस प्रकार पहली और तीसरी सूची को मिलाकर यह संख्या 67 होती है।

अब सवाल यह है कि सरयू समर्थक आज बीजेपी झारखंड के वैरीफाईड फेसबुक पेज पर यह क्यूँ पूछते नज़र आ रहे हैं कि जमशेदपुर पश्चिम सीट का क्या हुआ! सरयू रॉय की उम्मीदवारी का क्या हुआ? दरअसल भाजपा झारखंड के अपने वैरिफाईड फेसबुक पेज जिसे लगभग 2 लाख 10 हजार लोग फॉलो कर रहें है उस पर दूसरी सूची का कोई जिक्र ही दिखाई नही देता है।

तो कहाँ है और कैसी है झारखंड भाजपा की दूसरी सूची

तो हम आपको बता दें कि अपनी दूसरी सूची में भाजपा केवल एक नाम ही घोषित किया है वह भी कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष “सुखदेव भगत” का । सुखदेव भगत को भाजपा ने टिकट दिया है लोहरदगा विधानसभा से।

सुखदेव भगत 2014 में आसजू के किशोर भगत से चुनाव हार गए थे और बाद में किशोर भगत एक मामले में सजा हो गई। फिर हुए उपचुनाव में सुखदेव भगत जीत तो गए लेकिन चुनाव से पहले वे पाला बदल कर भाजपा में आ गए।

अब झारखंड चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है यह चुनाव रोज होती आपसी खींचतान के साथ साथ नए समीकरण भी बना रहा है। केंद्र में भाजपा के सहयोगी पासवान अपनी लोजपा एवं नीतीश कुमार अपनी जेडीयू लेकर मैदान में भाजपा से लड़ने को तैयार हो गए है जबकि आसजू जैसे पुराने साथी ने भी अपना संबंध भाजपा से तोड़ लिया है।

दूसरी ओर कांग्रेस ने जेएमएम से रिश्ता बनाकर हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर मैदान में उतारना सुनिश्चित किया है।

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